ग्राम सिलखोदरी

झाबुआ विकासखंड — ज़िला झाबुआ

ग्राम सिलखोदरी परिदृश्य
झाबुआ विकासखंड, झाबुआ ज़िला

ग्राम सिलखोदरी का सामाजिक-सांस्कृतिक एटलस

गाँव की पहचान, लोक इतिहास, प्रकृति, जल-संरचना और पारंपरिक भील सामाजिक व्यवस्था का संकलन।

गाँव के नाम की कहानी

गाँव की प्राकृतिक शिलाओं और जलधाराओं से सिलखोदरी नाम पड़ा। यहाँ शिवगंगा ग्राम वाचनालय सक्रिय रूप से संचालित है और दीवार पर ध्येय वाक्य अंकित है: "जो बांचेगा वही बचेगा"।

गाँव का इतिहास एवं बसाहट

सिलखोदरी में भील समुदाय के कई फलियों में परिवार बसे हैं। गाँव के बच्चों और बुजुर्गों ने मिलकर ज्ञान की पेटी का स्वागत किया।

नदी, तालाब, पहाड़ और जलस्रोत

गाँव के पास छोटे बंधान और तालाब हैं जो कृषि सिंचाई और पशुओं के पानी में सहयोग करते हैं।

पेड़-पौधे, पशु और वनस्पतियाँ

महुआ, ताड़, बबूल और पलाश वृक्ष।

खेती और चराई की जगहें

गाँव की शामलात भूमि।

पारंपरिक व्यवस्था एवं पंचायत

पारंपरिक ग्राम सभा और फलिया बैठक।

परंपराएँ, पर्व और त्योहार

भगोरिया, दिवाली नवाई और हलमा।

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