हमारे बारे में

ग्रामगुरुकुल प्रकाशन की शुरुआत, शिवगंगा की दृष्टि और हमारे मौलिक सवाल

शुरुआत क्यों हुई?

2009 में जब झाबुआ के सभी गाँवों में ग्राम वाचनालय स्थापित करने के लिए हमने उपयुक्त साहित्य ढूँढना शुरू किया, तब हमें गाँव के लोगों और बच्चों के हिसाब से बहुत कम सामग्री मिली।

वर्तमान शिक्षा में गाँव की बातें, देशी खेती, जल-संरक्षण और भील समाज के आत्मसम्मान का कोई स्थान नहीं था। यह पढ़ाई व्यक्ति को अपने ही गाँव, माता-पिता और समाज से अलग कर देती है।

गाँव का युवक अपने ही परिवेश को हीन भावना से देखने लगता है। इसी व्यथा और चिंता से ग्रामगुरुकुल प्रकाशन की नींव रखी गई।

पद्मश्री महेश शर्मा जी ग्रामीण बुजुर्ग के साथ आत्मीय संवाद करते हुए
गाँव के अग्रजों के साथ आत्मीय संवाद — यही है ग्रामगुरुकुल की प्रेरणा

हमारा ध्येय

"गाँव का परंपरागत ज्ञान और शहरों का आधुनिक विज्ञान — इन दोनों के आदान-प्रदान और परस्पर सम्मान के लिए ग्रामगुरुकुल प्रकाशन समर्पित है।"

लक्ष्य, गतिविधियाँ और कार्य

🎯 लक्ष्य

झाबुआ के ज्ञान को देश व दुनिया में सही रूप में ले जाना और नये ज्ञान को झाबुआ के गाँवों में सरल भाषा में पहुँचाना।

🌱 गतिविधियाँ

  • • शिवगंगा ग्राम वाचनालय (900+ गाँव)
  • • ग्रामगुरुकुल वर्ग (युवा व बालक)
  • • मासिक पत्रिका "भीलांचल की आवाज"

📖 कार्य

  1. 1. झाबुआ के ज्ञान को सही रूप में संकलित कर प्रकाशित करना।
  2. 2. आधुनिक विज्ञान को सरल हिंदी में लिखकर प्रकाशित करना।

जिन मौलिक सवालों पर हम काम कर रहे हैं

  • ?

    गाँव की शिक्षा कैसी हो, जो बच्चे को अपनी माटी से जोड़े रखे?

  • ?

    स्कूलों में स्थानीय इतिहास और पारंपरिक हुनर को कैसे शामिल किया जाए?

  • ?

    आधुनिक विज्ञान और तकनीक गाँव में सरल भाषा में कैसे आए?

सहयोग का खुला आमंत्रण

हम इस व्यापक कार्य में समर्पित हैं, लेकिन इस यज्ञ को पूर्ण करने के लिए हमें और भी हाथों की ज़रूरत है:

  • लगातार इसी विषय पर काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की आवश्यकता
  • स्थानीय भीली, हिंदी और अंग्रेज़ी लेखकों और अनुवादकों की कमी
  • ग्रामीण विषयों का गहराई से अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं की आवश्यकता
  • पुस्तक सज्जा एवं डिज़ाइनरों की आवश्यकता
  • गाँव के प्राचीन इतिहास और देशी बीजों के विषय विशेषज्ञों की आवश्यकता

अगर आप इस काम में सहयोग देना चाहते हैं — चाहे लेखन में, शोध में, अनुवाद में, पुस्तक सज्जा में या गाँव के ज्ञान को दर्ज करने में — हम आपका सस्नेह स्वागत करते हैं।

हमसे जुड़ें एवं सहयोग करें