ग्राम वाचनालय

"जो बांचेगा वही बचेगा" — झाबुआ के हर गाँव में ज्ञान का सामुदायिक दीप

ग्राम वाचनालय क्या है?

ग्राम वाचनालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में ज्ञान, संस्कार और स्वाभिमान का जीवंत केंद्र है।

झाबुआ ज़िले के 900 से अधिक गाँवों में हर गाँव में एक सुदृढ़ पेटी में 125 चुनिंदा पुस्तकें पहुँचाई गई हैं, जो 14 जीवनोपयोगी विषयों को समाहित करती हैं।

"जो बांचेगा वही बचेगा" — यानी जो जानेगा, वही अपने जल, जंगल, ज़मीन, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा कर सकेगा।
शिवगंगा ग्राम वाचनालय सिलखोदरी — जो बांचेगा वही बचेगा
ग्राम सिलखोदरी: शिवगंगा ग्राम वाचनालय — "जो बांचेगा वही बचेगा"
900+

गाँवों में वाचनालय

125

पुस्तकें प्रति पेटी

14

ज्ञान के विविध विषय

2009

से अविरल ज्ञान-यात्रा

125 पुस्तकों की पेटी

गाँव के बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए संजोया गया ज्ञान का भंडार

ग्राम वाचनालय में रखी 125 पुस्तकों का वास्तविक संचयन
वाचनालय पेटी में उपलब्ध वास्तविक पुस्तकें

रामायण से लेकर आज़ाद व विज्ञान तक

हर पेटी में सम्पूर्ण रामायण, अमर क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, स्वामी विवेकानन्द, पंचतंत्र, अकबर-बीरबल, विक्रम बेताल, और सरल कृषि-स्वास्थ्य की पुस्तकें शामिल हैं।

पेटी लोहे की टिकाऊ धातु से बनाई जाती है जिस पर शिवगंगा का प्रतीक चक्र अंकित होता है, ताकि बारिश और धूप में भी ज्ञान सुरक्षित रहे।

वाचनालय में समाहित 14 विषय

खेती एवं कृषिस्थानीय देशी खेती के तरीके और फसलें
पशुपालनपशुओं की देखभाल और संवर्धन
स्वास्थ्य एवं आयुर्वेदप्राकृतिक स्वास्थ्य और जड़ी-बूटियाँ
भील समाज व इतिहासगौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता सेनानी
लोककथाएँ एवं गाथाएँगाँव की कहानियाँ और लोकगाथाएँ
बाल साहित्यबच्चों के लिए सचित्र प्रेरणादायी पुस्तकें
सरल विज्ञानसरल भाषा में प्रायोगिक विज्ञान
शिक्षा एवं संस्कारजीवन निर्माण और शिक्षा
भाषा एवं व्याकरणहिंदी और स्थानीय बोली
महिला एवं बाल विकासमातृ-शिशु स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण
जल-जंगल-ज़मीनहलमा और प्राकृतिक संसाधन
संस्कृति एवं परंपराएँभील संस्कृति, पर्व और लोककला
कौशल एवं स्वावलंबनग्रामीण हुनर और स्वरोज़गार
ग्राम व्यवस्था एवं न्यायगाँव की पारंपरिक तड़वी-बड़वा व्यवस्था

धरातल पर ग्राम वाचनालय — प्रत्यक्ष चित्र

झाबुआ के फलियों और चौपालों में पुस्तकों का उत्सव और ग्रामीणों की सहभागिता

शिवगंगा ग्राम वाचनालय — सिलखोदरी

शिवगंगा ग्राम वाचनालय — सिलखोदरी

गाँव की दीवार पर लिखा नारा: "जो बांचेगा, वही बचेगा"। ग्रामीण बुजुर्ग और बच्चे पेटी के साथ।

125 पुस्तकों का विशेष संचयन

125 पुस्तकों का विशेष संचयन

सम्पूर्ण रामायण, चन्द्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, शिवाजी, विवेकानन्द, पंचतंत्र से सजी वाचनालय पेटी।

गाँव के बच्चों का पठन चक्र

गाँव के बच्चों का पठन चक्र

सफेद धातु पेटी के चारों ओर बैठकर उत्साह से कहानियाँ और महापुरुषों की जीवनी पढ़ते बच्चे।

वितरण एवं शुरूआत — उदयपुरिया व धरमपुरी

वितरण एवं शुरूआत — उदयपुरिया व धरमपुरी

27 अक्टूबर 2023 को उदयपुरिया और धरमपुरी में ग्राम वाचनालय की औपचारिक स्थापना।

वितरण — ग्राम भमरदा

वितरण — ग्राम भमरदा

27 अक्टूबर 2023 को ग्राम भमरदा में वाचनालय पेटी सौंपते हुए शिवगंगा कार्यकर्ता।

गाँव-गाँव तक ज्ञान का सफर

गाँव-गाँव तक ज्ञान का सफर

मोटरसाइकिल पर पेटी लादकर ग्राम-चुही पहुँचाते युवा कार्यकर्ता ("भीलांचल की आवाज")।

प्रमुख ग्राम वाचनालय केंद्र

झाबुआ के विभिन्न विकासखंडों में सक्रिय सामुदायिक पुस्तकालय

गाँव एटलस में देखें →

ग्राम सिलखोदरी

झाबुआ

ज़िला: झाबुआ

📌 सक्रिय वाचनालय — "जो बांचेगा वही बचेगा"

ग्राम उदयपुरिया

झाबुआ

ज़िला: झाबुआ

📌 वितरण व शुरूआत: 27/10/2023

ग्राम धरमपुरी

झाबुआ

ज़िला: झाबुआ

📌 वितरण व शुरूआत: 27/10/2023

ग्राम भमरदा

झाबुआ

ज़िला: झाबुआ

📌 वितरण व शुरूआत: 27/10/2023

ग्राम सेमलपाड़ा

थांदला

ज़िला: झाबुआ

📌 ग्रामगुरुकुल वर्ग एवं सक्रिय वाचनालय

ग्राम सालारपाड़ा

झाबुआ

ज़िला: झाबुआ

📌 3 फलियों के 49 युवा सक्रिय पाठक

ग्राम चंद्रगढ़

झाबुआ

ज़िला: झाबुआ

📌 कृषक एवं युवा पाठक समूह

ग्राम मेघनगर

मेघनगर

ज़िला: झाबुआ

📌 नियमित पठन सत्र

ग्राम पेटलावद

पेटलावद

ज़िला: झाबुआ

📌 सक्रिय पुस्तकालय केंद्र

गाँव के पाठकों के अनुभव

जब हाथ में किताब आई, तो कैसे बदल गई सोच और गाँव का माहौल

"वाचनालय में खेती और जल-संरक्षण की किताब पढ़ने के बाद हमने खेत के किनारे मेड़बंदी की और खाद का देसी तरीका अपनाया। मिट्टी और फसल दोनों में फर्क दिखा।"

कमलेश भाई भीलग्राम: सिलखोदरी (झाबुआ)

"हमारे गाँव में जब से वाचनालय की पेटी आई है, शाम को बच्चे एक जगह बैठकर महापुरुषों और पंचतंत्र की कहानियाँ पढ़ते हैं। इससे उनमें सीखने की ललक बढ़ी है।"

राधा बाईग्राम: उदयपुरिया (झाबुआ)

"किताबों से हमें पता चला कि हमारे पूर्वजों ने देश की आज़ादी में कितना बड़ा बलिदान दिया। यह पढ़कर गाँव के युवाओं का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।"

दिनेश तड़वीग्राम: भमरदा (झाबुआ)