
शिवगंगा ग्राम वाचनालय — सिलखोदरी
गाँव की दीवार पर लिखा नारा: "जो बांचेगा, वही बचेगा"। ग्रामीण बुजुर्ग और बच्चे पेटी के साथ।
"जो बांचेगा वही बचेगा" — झाबुआ के हर गाँव में ज्ञान का सामुदायिक दीप
ग्राम वाचनालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में ज्ञान, संस्कार और स्वाभिमान का जीवंत केंद्र है।
झाबुआ ज़िले के 900 से अधिक गाँवों में हर गाँव में एक सुदृढ़ पेटी में 125 चुनिंदा पुस्तकें पहुँचाई गई हैं, जो 14 जीवनोपयोगी विषयों को समाहित करती हैं।
"जो बांचेगा वही बचेगा" — यानी जो जानेगा, वही अपने जल, जंगल, ज़मीन, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा कर सकेगा।

गाँवों में वाचनालय
पुस्तकें प्रति पेटी
ज्ञान के विविध विषय
से अविरल ज्ञान-यात्रा
गाँव के बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए संजोया गया ज्ञान का भंडार

हर पेटी में सम्पूर्ण रामायण, अमर क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, स्वामी विवेकानन्द, पंचतंत्र, अकबर-बीरबल, विक्रम बेताल, और सरल कृषि-स्वास्थ्य की पुस्तकें शामिल हैं।
पेटी लोहे की टिकाऊ धातु से बनाई जाती है जिस पर शिवगंगा का प्रतीक चक्र अंकित होता है, ताकि बारिश और धूप में भी ज्ञान सुरक्षित रहे।
झाबुआ के फलियों और चौपालों में पुस्तकों का उत्सव और ग्रामीणों की सहभागिता

गाँव की दीवार पर लिखा नारा: "जो बांचेगा, वही बचेगा"। ग्रामीण बुजुर्ग और बच्चे पेटी के साथ।

सम्पूर्ण रामायण, चन्द्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, शिवाजी, विवेकानन्द, पंचतंत्र से सजी वाचनालय पेटी।

सफेद धातु पेटी के चारों ओर बैठकर उत्साह से कहानियाँ और महापुरुषों की जीवनी पढ़ते बच्चे।

27 अक्टूबर 2023 को उदयपुरिया और धरमपुरी में ग्राम वाचनालय की औपचारिक स्थापना।

27 अक्टूबर 2023 को ग्राम भमरदा में वाचनालय पेटी सौंपते हुए शिवगंगा कार्यकर्ता।

मोटरसाइकिल पर पेटी लादकर ग्राम-चुही पहुँचाते युवा कार्यकर्ता ("भीलांचल की आवाज")।
झाबुआ के विभिन्न विकासखंडों में सक्रिय सामुदायिक पुस्तकालय
ज़िला: झाबुआ
📌 सक्रिय वाचनालय — "जो बांचेगा वही बचेगा"
ज़िला: झाबुआ
📌 वितरण व शुरूआत: 27/10/2023
ज़िला: झाबुआ
📌 वितरण व शुरूआत: 27/10/2023
ज़िला: झाबुआ
📌 वितरण व शुरूआत: 27/10/2023
ज़िला: झाबुआ
📌 ग्रामगुरुकुल वर्ग एवं सक्रिय वाचनालय
ज़िला: झाबुआ
📌 3 फलियों के 49 युवा सक्रिय पाठक
ज़िला: झाबुआ
📌 कृषक एवं युवा पाठक समूह
ज़िला: झाबुआ
📌 नियमित पठन सत्र
ज़िला: झाबुआ
📌 सक्रिय पुस्तकालय केंद्र
जब हाथ में किताब आई, तो कैसे बदल गई सोच और गाँव का माहौल
"वाचनालय में खेती और जल-संरक्षण की किताब पढ़ने के बाद हमने खेत के किनारे मेड़बंदी की और खाद का देसी तरीका अपनाया। मिट्टी और फसल दोनों में फर्क दिखा।"
"हमारे गाँव में जब से वाचनालय की पेटी आई है, शाम को बच्चे एक जगह बैठकर महापुरुषों और पंचतंत्र की कहानियाँ पढ़ते हैं। इससे उनमें सीखने की ललक बढ़ी है।"
"किताबों से हमें पता चला कि हमारे पूर्वजों ने देश की आज़ादी में कितना बड़ा बलिदान दिया। यह पढ़कर गाँव के युवाओं का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।"